मकड़ी का जाला

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मकड़ी का एक जाला
लटका हुआ सा दिखा 
उसमे अटकी हुई एक ज़िन्दगी भी  
और दिखी भूख 
जीने की 
दोनों तरफ
आज फिर एक जाला देखा
लटका हुआ खुद को पाया 
और तुम मिले वहीँ नज़दीक 
ज़ाले में लिपटे हुए डरे
हमने भी डर कर थमा दिया 
एक टूटा पंख उम्मीदों का   
और फिर साल गुज़रा 
अब भी वो मकड़ी का जाला 
सालों से अब तो 
लटक रहा है छज्जे से 
और हम लटके हैं 
लिपटे अपने जालों में 
लिपटाये उन जालों को 
सांस दबा के बैठे हैं 
आज मिला एक लटका जाला

 

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