Rebirth

rebirth

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Twisted. 

Rinse me
Crush my bones
Twist my spine
Brother mine

Break in half
Across the middle
Release the ache
Play me fiddle

Too many ropes
Hope in hopes
Acid tongue
Squiggles & slopes

Trip & fall
Or not at all
Patterned wall
A cosmic crawl

Do crush my skull
Don’t make it dull
Ignore the white flag
On my hull.

 

आप कौन?

जाने दो
आज इसे बस जाने दो
सन्नाटे का ये बुखार
चढ़ता है, चढ़ जाने दो

रात को बिस्तर
खाली तो क्या
तकिये पे सर रख
मुझे अकेले बड़बड़ाने दो

जितने मिले, सब खोटे से
सबके अरमान छोटे से
हम मिले भी तो क्या ही मिले
होते होते होते से

शाम को टप टप
काम को टप टप
दिल की खाली होती टंकी
हम भरते रहे क्यों लोटे से

झूला, आँगन, चौखट छूटा
सर्दी छूटी, कम्बल छूटा
और छूट गया कंधे पर
रिश्ता एक ये टूटा फूटा

सब की फ़िक्र में लग लग के
अपनों से क्यों नाता टूटा
पराये तो फिर भी बेहतर थे
हमने खुद का आशियाँ लूटा

Old wooden ladder on a cement wall

an old wooden ladder is leaning up against a concrete wall

 

गुमनाम से ईटों वाला स्टेशन

वो गुमनाम से ईटों वाला स्टेशन याद है?
जहाँ दौड़ के पापा मिल्टन में पानी भर लाया करते थे
थोड़े बड़े हुए तो हम भी उतरा करते थे
एक हाथ गेट की हैंडल पे रख के
और दोनों कान ट्रैन के सिग्नल पे रख कर।

वो अकेला सा गुलमोहर याद है?
छाओं न सही, रंग तो भर ही देता था
उस अंधी धुप में खड़ा हुआ सबको ताकता सा
उससे वो गर्मियों की छुट्टियों की महक
अभी भी आती तो होगी झुलसती दोपहरों में।

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मकड़ी का जाला

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मकड़ी का एक जाला
लटका हुआ सा दिखा 
उसमे अटकी हुई एक ज़िन्दगी भी  
और दिखी भूख 
जीने की 
दोनों तरफ
आज फिर एक जाला देखा
लटका हुआ खुद को पाया 
और तुम मिले वहीँ नज़दीक 
ज़ाले में लिपटे हुए डरे
हमने भी डर कर थमा दिया 
एक टूटा पंख उम्मीदों का   
और फिर साल गुज़रा 
अब भी वो मकड़ी का जाला 
सालों से अब तो 
लटक रहा है छज्जे से 
और हम लटके हैं 
लिपटे अपने जालों में 
लिपटाये उन जालों को 
सांस दबा के बैठे हैं 
आज मिला एक लटका जाला

 

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धूप

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तुम धूप हो
कभी ओस की बूँद पे चमकती हुई
कभी मरीचिका
गर्मियों के जलते दोपहर में
रास्तों को और लम्बा करती हुई
जला मैं भी
कभी होली के पापड़ की तरह
और कभी भुना मिला
भुट्टे की कालिख जैसे
सर्दिओं की दोपहरों में
अमरुद और संतरों के बीच
अपना बीज़ गिरा
मैं सूखा, पनपा
तुम्हारी तरफ पलटा
मेरा ठंडा बदन
सुकून सेकने
फिर भागा मैं
जलते लू से
वापस उसी अंधे कुएं में
जिससे निकला था
तुम्हे लपेटने को
अपने अंदर बाहर
अँधेरा बुरा सही
पर एक जानी पहचानी परछाई है
पर तुम
तुम्हे क्या कहूँ?
क्यूंकि तुम तो धूप हो।

 

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